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डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक टैरिफ धमकियों के बावजूद भारत लगातार आर्थिक मोर्चे पर आगे बढ़ रहा है। भारत ने अपने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए ओमान और न्यूजीलैंड के बाद अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का रास्ता तैयार किया है। यह डील न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करेगी, बल्कि भारत को यूरोपीय बाजार में मजबूत एंट्री का अवसर भी देगी।
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यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा है। इससे भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे और निवेश के लिए भरोसा बढ़ेगा।
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भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई जटिल मुद्दों के कारण यह 2013 में ठंडे बस्ते में चली गई। भारत ने कृषि, डेयरी और उच्च शुल्क वाले शराब एवं कारों के मुद्दों पर अपनी रुख मजबूती से रखा था।
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जून-जुलाई 2021 में बातचीत फिर से शुरू हुई। इसके बाद अक्टूबर 2025 तक 14 मीटिंग्स हुईं। इन बैठकों में दोनों देशों ने पुराने मुद्दों का समाधान खोजा और डील को अंतिम रूप देने की योजना बनाई।
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27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में EU की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास भी मौजूद थीं। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि, समझौता दोनों देशों के रक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए सहयोग बढ़ाएगा।
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भारत से EU निर्यात: ₹6.9 लाख करोड़
मुख्य उत्पाद: डीजल, एविएशन फ्यूल, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, केमिकल्स, फार्मा, लोहा-इस्पात, हीरे और ज्वेलरी
EU से भारत आयात: ₹5.5 लाख करोड़
मुख्य उत्पाद: हाई-एंड मशीनरी, इंडस्ट्रियल उपकरण, टर्बोजेट इंजन, मोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, विमान और मेडिकल डिवाइसेज
विशेष तथ्य: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन विदेशी कार कंपनियों की हिस्सेदारी 4% से कम है। अब टैक्स घटने से कंपनियां ज्यादा मॉडल भारत में बेच पाएंगी और निवेश बढ़ेगा।
उद्योग और निर्यात: कपड़ा, जूते, लेदर, जेम्स और ज्वेलरी, हस्तशिल्प और फार्मा सेक्टर को लाभ मिलेगा।
निवेश बढ़ेगा: फ्रांस, जर्मनी जैसे EU देश भारत में डिफेंस फैक्ट्रियां लगा सकते हैं।
प्रोडक्ट लागत कम होगी: स्टील, एल्युमिनियम, हाइड्रोजन और अन्य उद्योगों को यूरोप के कार्बन टैक्स में राहत।
बाजार पहुंच: EU के 27 देशों में भारतीय कंपनियों की आसान एंट्री।
रोजगार: निवेश और व्यापार बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सप्लाई चेन सुधार: चीन पर निर्भरता कम होगी।
भारत के लिए:
EU के लिए:
डेयरी और कृषि सेक्टर : FTA में कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा गया। भारत और EU दोनों अपने किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।
FTA (Free Trade Agreement) दो देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत दोनों देश टैरिफ, कोटा और सब्सिडी जैसी बाधाओं को कम या पूरी तरह से खत्म कर देते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार को सहज और सुविधाजनक बनाना होता है। इस तरह के समझौते में दोनों देश एक-दूसरे पर कम या जीरो टैक्स लगाते हैं, जिससे निर्यात और आयात दोनों को बढ़ावा मिलता है और आर्थिक सहयोग मजबूत होता है।
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